वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा होना चाहिए घर, जानिए वास्तु टिप्स
Vastu Shastra | Posted by Shyam Mishra on October 3rd, 2021 | Comments
घर बनवाते समय कई प्रकार की बातों को ध्यान में रखकर बनवाना चाहिए जिसमे वास्तु एक प्रकार की सबसे मुख्य भारतीय समाज की सदियों से चली आ रही पुरानी परंपरा है। यदि इसके सभी नियमों को केंद्र बनाते हुए अपने पूरे घर का निर्माण करवाएं तो जीवन सुखमय हो जाता है। वास्तु में सबसे बड़ा महत्व दिशाओं का है। अगर घर में गलत दिशा में कोई निर्माण होगा तो उससे परिवार को किसी न किसी तरह की हानि होगी। घर बनावाते समय अगर कुछ नियमों का पालन किया जाए तो परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि हमेशा बनी रहती है। आईए जानें घर बनाने संबंधित कुछ टिप्स:
1. दिशा का रखे विशेष ध्यान।

घर बनवाते समय हमे दिशाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। घर की बनावट इन चार - दिशाओं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के आधार पर तय होती है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा की और हो तो यह बहुत शुभ होता है । पूर्व की दिशा में मुख्य द्वार के होने अनेकों लाभ होने की संभावनाएं होती है। सूर्योदय के बाद अरुण की पहली किरण से लेकर सुबह सुबह सूर्य के दर्शन का सुनहरा अवसर रहता है। हां लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है, कि और दिशाएं अशुभ हैं |
2 पूजा घर के लिए सही स्थान का चुनाव।

हिंदू धर्म में हर कोई अपने घर में एक पूजा घर या फिर पूजा स्थल की स्थापना चाहता है। घर में सुख , शांति और समृद्धि के लिए पूजा पाठ जरूरी भी होता है। इसलिए घर बनवाते समय एक पूजा घर या पूजा स्थल के उचित स्थान का चयन करे। एक बात का अवश्य ध्यान दे , कि मंदिर के पास शौचालय ना हो। और संभव हो तो मंदिर का भी मुख्य द्वार पूर्व की तरफ हो।
3 . बेडरूम :-

इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पूजा घर और आपका सयन कक्ष एक कमरे में न हो क्योंकि ये सदा वर्जित माना जाता रहा है। और घर में सीढ़ियाँ हमेशा विषम संख्या में हो तो उसे शुभ माना जाता है।
4. सभी दिशाओं थोड़ा खुली जरूर छोड़े :-
आप जब भी अपना घर बनवाते हैं या फिर बनवाने का विचार बनाते है तो इस बात का विशेष ध्यान दें कि आप अपने घर में पूर्व दिशा में और उत्तर दिशा में थोड़ा अधिक खुली जगह छोड़ें। बाकी दोनों दिशा पश्चिम और दक्षिण में अगर आप स्थान न भी छोड़ें तो भी चलेगा। और इस बात का खास ध्यान रखे की दक्षिण दिशा में अपने जमीन से बढ़कर घर बनवाने की कोशिश भी न करें। क्योंकि इससे पूरे परिवार पर संकट माना जाता है।
5 पानी रखने की सही दिशा:

वास्तुशास्त्र के अनुसार जल का शुभ स्थान ईशान कोण (पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं उस स्थान को ईशान दिशा कहते हैं) को माना गया है। पानी का भण्डारण अथवा भूमिगत टैंक या बोरिंग पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होनी चाहिए। इससे पेयजल के दूषित होने संभावनाएं कम होती है।
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